शापित

पुरे मोहल्ले में बदनाम थी …मोहल्ले के सभी माताओं और उनके बच्चों के लिए घृणा का पात्र…बांझ,बदचलन तो उसका पति भी कहता था …कूटता भी रहता था आए दिन …मगर वो ब्राह्मणी इस ब्राह्मणों के मोहल्ले में बिलकुल अकेली थी …कोई बात नहीं करता था उससे …सभी माताओं ने अपने-अपने बच्चों तक को सीखा रहा था ..कोई नहीं जाना उसके घर के भीतर …कुछ खाने को दे तो बिलकुल न खाना ..टोना मारके पागल करा देगी…वो ये सब जानती समझती थी,मगर कभी जबाब नहीं देती थी …न पति को न इन मोहल्ले वाली माताओं को…बस अपने दरवाजे से सबको देखा करती थी …छोटे बच्चों को बहुत प्यार से देखती-निहारती थी। मगर बच्चे तो खौफ खाते थे उससे …..
मैं अक्सर उसे देखा करता था आते जाते …उस समय मेरी उम्र दस बरस रही होगी करीब …बहुत खूबसूरत थी वो…एक दिन उसने मुझे भीतर बुला ही लिया। प्लेट में नमकीन-मिठाई रख दी खाने के लिए …और बार-बार आग्रह करने पर भी जब मैं नहीं खा रहा था तो एकदम से आँसू छलक आये उसकी आँखों में …और खूबसूरती के बाद आँसू मेरी दूसरी कमज़ोरी रही ही है …आखिर खाना पड़ा। मगर अब दिमाग में सवाल ही सवाल …क्या मुझे भी अब टोना लग चुका है??क्या अब मैं पागल होने से बचूँगा ???…दिन के साथ पुरी रात हनुमान चालिसा शुरू कर दी थी मन ही मन …
दुसरे दिन सुबह उठते ही खुद को चेक किया सबसे पहले …जितनी भी कविताएँ कंठस्थ थी सब दोहरा दी…कहीं कोई दिक्कत नहीं …दो चमत्कार हो चुके थे हनुमान चालीसा की वजह से पागल भी नहीं हुआ था और माँ के हाथ धुलाई से भी बच गया था …इस मामले में …अब तो आये दिन मैं उसके घर के भीतर चले जाता…उसके छोटे-मोटे काम भी कर-करा देता …बदले में मिठाई और नमकीन भी मिलती थी …और हनुमान जी इस मामले में मुझे बचा लेते थे हरबार ….माँ की मार से भी …सबकुछ जानकर भी कुछ नहीं बोलती मुझे। वैसे पुरे मोहल्ले वाले इसके लिए मुझे तमाम बातें सुनाया करते थे …बगावत जो छेड़ रक्खी थी मैने उनके नियम के खिलाफ …. ….
फिर एक दिन सुबह-सुबह अपने पति के कामपर जाने के बाद उसने मिट्टी का तेल छिड़ककर घर में खुद को आग लगा ली…बहुत बुरी तरह जलने के बाद जमीन पर गिरकर कराहने और तड़पने लगी…मगर जो मोहल्ला जीते जी कभी उसकी खबर लेने नहीं गया वो उसे इस हालत में क्या मदद करता ….कुछ देर कराहने-तड़पने के बाद वो घीसटते-घीसटते दरवाजे से बाहर आ गयी और सभी की ओर देख-देखकर मदद मांगने लगी। मगर लोग दूर से देखते रहे तमाशा …कोई मदद करने नहीं जा रहा था उसकी ….
अचानक उसकी आँख मदद मांगते हुए मुझतक भी पहुँच गयी …वो बस पीने के लिए पानी मांग रही थी …. जलन की पीड़ा से याचना कर रही थी …मगर लोग मना कर रहे थे …कि, पानी पीते ही मर जाएगी और पोलिस उसी को पकड़ेगी…पानी पिलाने वाले को …इन सबके बीच मेरे अन्दर एक खतरनाक द्वंद भी चल रहा था बहुत जोरों से …अनगिनत बार उसकी मिठाई नमकीन खाने के बाद आज मैं उसे पानी के कुछ बुंद देने में असमर्थ था …
आखिर मैने फिर से बगावत की ….घर में से एक लोटा पानी ले आया …सभी जोर-जोर से चिल्लाते हुए मुझे मना करने लगे …मगर माँ मना नहीं कर रही थी आज भी।वो पानी का लोटा तक अपने हाथों में पकड़ने में असमर्थ थी। जमीन से थोड़ा सा सिर उठाकर मैने उसे पानी पिलाया…मेरे ऐसा करते हुए उसकी जली-गली,टपकती हुई चमड़ी मेरे हाथों में,कमीज में और यहाँ तक की मेरे गालों पर भी चिपक चुकी थीं। पानी पीने के बाद उसने अपनी बंद होती आँखों से मुझे बहुत प्यार से देखा…खैर करीब घंटे भर बाद एम्बुलेंस आयी और लेकर गयी उसे।
अगली सुबह उसकी मौत की खबर हमारे मोहल्ले में रामायण,बुनियाद सीरियल की तरह चर्चा का विषय थी पुरे दिन। मैने भी उसके घर के पास से गुजरते हुए फिर से अपने गालों को हाथ लगाया …अजीब सी महक आ रही थी मेरे गालों से …उसकी चमड़ी की …जली गली चमड़ी की …पुरे मोहल्ले में महीनों तक अफवाह थी जलकर मरी है …भूतनी बनेगी …और सबसे पहले मुझसे बदला लेगी…मैने ही तो पानी पिलाया था उसे ….मगर। वो नहीं आयी ….सपने में भी नहीं आयी कभी ….हाँ उसकी महक हमेशा आती रही जब भी गालों को छुआ मैने …
आज भी कभीकभार आती है ….महक…उसकी चमड़ी की …..

Shyamsunder

One Comment

Add a Comment

Your email address will not be published.