चतुर बनियोंका राज..

चतुर बनियोंका राज..

आजकल चतुर बनियोंका राज चालू है. लेकिन दुःख की बात ये है की उनको सिर्फ छोटे चोर नजर आते है. जबकी बड़े चोर चोरी भी बड़ी करते है.

क्योंकि गए तिन सालोसे. सरकार जैसे छोटे बेपारी एवं ,भागीदारी संस्था और पगारदार लोग. इन सब चोरोंको चारो तरफ से घेरना चालू है.

पहीला काम इनोने किया आधार कार्ड कि सख्ती. पॅन और आधार को जोडना.

नोटबंदी किया था अलग मकसदसे. लेकिन सबने मजबुरी मे दो महिना ऑनलाइन व्यवहार किये, ओर पकडे गये.

जीन लोगोने लोगोका बँक मे आया हुआ पैसे रोख वापीस किया वो भी उनका लेनदेन हो गया.

ओर तो ओर GST के नामपर 3 से 12 टका अप्रत्यक्ष कर का बोजा बढा दिया वो अलग.

लेकिन बडे उद्योगवाले बडे सुखी है. सरकार बिलकुल दयाभाव से उसकी तरफ देखता है. मानो जैसे भगवान है.

उनको कर्जमाफी, उनको करमाफी, उनको कम दामो मे बडे भूखंड. मानो जैसे हर जगह उनके लीये रेड कार्पेट बिछाया है.

इतनी मेहरबानी उद्योगोको ओर गरीब किसानॉको बाबाजी का ठल्लू.  उनको ना कर्जमाफी ना हमीभाव.

ओर बाकी बची जनता तो केवल वोट देनेवाला भुलक्कड मशीन है. उसकी क्या अहमियत् है?

सब कूच गिने चुने अमिरोंके लिये. भाई चतुर बनियोन्को आपने ठिकसे जाना नही.

वो उनके दाता है भगवान ओर अब तो ऐसा कानून पारित हुआ है. की जीससे राजकीय बनियोन्का ओर बडे उद्योग दोनोका भला हो.

उदयोग कितानाभी चंदा किसींभी पक्ष को दे शकते है. ओर किसको कितना दिया ये बहिखाते मे लिखनेसे आझादी.


फिर वो कोई भी काम बनियोसे ले ले कोई पछतावा नही.

मरनेके लिये ओर थोडे वायदे कर दो जनता वोट देने तयार. चोरोंको पकड़ना बुरी बात नहीं है. लेकिन चोरोके बिच भेदभाव दिखाना बुरी बात है. और इन बनियोंकी यही निति है. छोटे चोरोंको पकड़ो कर बढाओ बड़े चोरोंको खानेके लिए आझाद छोड़ दो. सब कैसे पारदर्शक.


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